भारत के इतिहास में जब भी एकता और अखंडता की बात होती है, एक नाम सबसे पहले आता है – सरदार वल्लभभाई पटेल. उन्हें स्नेह से ‘सरदार’ और सम्मान से ‘भारत के लौह पुरुष’ (Iron Man of India) कहा जाता है. वह केवल एक स्वतंत्रता सेनानी या वकील नहीं थे, बल्कि वह आधुनिक भारत के मुख्य शिल्पकार थे, जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प से 562 से अधिक रियासतों को एक करके भारत राष्ट्र का निर्माण किया.
एक साधारण किसान परिवार में जन्मे पटेल की यह यात्रा, जो उन्हें देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पद तक ले गई, हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है. आइए, भारत के इस महान सपूत के जीवन और विरासत को करीब से जानें.
सरदार पटेल: एक नजर में (Sardar Patel: At a Glance)
विषय (Attribute) | जानकारी (Details) |
पूरा नाम | वल्लभभाई झावेरभाई पटेल |
प्रसिद्ध नाम | सरदार पटेल, भारत के लौह पुरुष |
जन्म | 31 अक्टूबर 1875, नडियाद, गुजरात |
मृत्यु | 15 दिसंबर 1950, मुंबई, महाराष्ट्र |
पिता का नाम | झवेरभाई पटेल |
माता का नाम | लाडबा देवी |
मुख्य भूमिका | वकील, स्वतंत्रता सेनानी, भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री |
सबसे बड़ा योगदान | भारतीय रियासतों का एकीकरण |
सम्मान | भारत रत्न (1991, मरणोपरांत) |
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में हुआ था. उनका बचपन करमसाद के खेतों में बीता. उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं हुई और उन्होंने 1897 में अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की.
पटेल बचपन से ही बहुत दृढ़ और महत्वाकांक्षी थे. उनका सपना इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई करना था. उन्होंने पैसे बचाए और यात्रा की तैयारी की, लेकिन जब पोस्टमैन उनके बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल को उनका पास और टिकट देने आया, तो उन्होंने अपने बड़े भाई को पहले जाने का अवसर दिया. यह उनके त्याग और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है. बाद में, उन्होंने खुद लंदन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की और भारत लौटकर अहमदाबाद में एक सफल वकील के रूप में अपनी पहचान बनाई.
स्वतंत्रता संग्राम में प्रवेश और एक नेता का उदय

शुरुआत में, सरदार पटेल पश्चिमी जीवनशैली से काफी प्रभावित थे और राजनीति में उनकी कोई खास रुचि नहीं थी. लेकिन 1917 में जब उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई, तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गई. वह गांधीजी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों से इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने अपनी सफल वकालत छोड़कर खुद को पूरी तरह से भारत के स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित कर दिया.
खेड़ा और बारडोली सत्याग्रह:
उनका नेतृत्व पहली बार 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में चमका, जहाँ उन्होंने किसानों को ब्रिटिश सरकार के दमनकारी करों के खिलाफ एकजुट किया. उनकी सफलता से गांधीजी बहुत प्रभावित हुए.
लेकिन 1928 का बारडोली सत्याग्रह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था. यहां उन्होंने किसानों का नेतृत्व इतने शानदार ढंग से किया कि ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा. इसी आंदोलन की सफलता के बाद, वहां की महिलाओं ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि दी, जिसका अर्थ ‘नेता’ या ‘प्रमुख’ होता है. इसके बाद से वह पूरे देश में सरदार पटेल के नाम से जाने गए.
भारत का एकीकरण: सबसे बड़ी चुनौती
1947 में जब भारत आजाद हुआ, तो यह खुशी अधूरी थी. अंग्रेजों ने भारत को 562 से अधिक छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ छोड़ दिया था, जिनके पास भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का विकल्प था. यह भारत की एकता के लिए सबसे बड़ा खतरा था.
इस असंभव से लगने वाले कार्य की जिम्मेदारी भारत के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल ने उठाई. उन्होंने ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की नीति अपनाकर रियासतों से बातचीत शुरू की. उनकी देशभक्ति की अपील और दृढ़ इरादों के कारण अधिकांश रियासतें स्वेच्छा से भारत में शामिल हो गईं.
लेकिन हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी कुछ रियासतों ने स्वतंत्र रहने का फैसला किया. यहां पटेल ने अपनी ‘लौह पुरुष’ की छवि को सही साबित किया. उन्होंने हैदराबाद में सैन्य कार्रवाई (‘ऑपरेशन पोलो’) करके उसे भारत में मिलाया और जूनागढ़ में जनमत संग्रह कराया. उनकी इसी निर्णायक क्षमता के कारण आज हम एक अखंड भारत देख पाते हैं.
अंतिम वर्ष और विरासत
स्वतंत्रता के बाद, पटेल ने देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में कार्य किया. उन्होंने विभाजन के बाद हुए दंगों को नियंत्रित करने और शरणार्थियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने ही ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा’ (IAS) की नींव रखी, जो आज भी देश की प्रशासनिक रीढ़ है.
1950 की गर्मियों में उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और 15 दिसंबर 1950 को दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में उनका निधन हो गया. 1991 में, राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न, से सम्मानित किया गया.
सरदार पटेल की विरासत आज भी प्रासंगिक है. वह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं – एकता, अखंडता और दृढ़ संकल्प का विचार.
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: एक आधुनिक श्रद्धांजलि
सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने के लिए, गुजरात के नर्मदा जिले में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण किया गया है. 182 मीटर (597 फीट) की ऊंचाई वाली यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. यह सिर्फ एक स्मारक नहीं है, बल्कि यह सरदार पटेल के उस सपने का प्रतीक है, जिसमें उन्होंने एक एकजुट और मजबूत भारत की कल्पना की थी.


